गांव की शादी हो, मकर संक्रांति का हल्दी-कुंकू हो या मंगळागौर का उत्सव—अगर वहां हंसी, मस्ती और अपनापन दिखे, तो समझ जाइए कि कहीं न कहीं उखाणे जरूर लिए जा रहे हैं।
कुनबी मराठा समाज में उखाणे सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि दिल से जुड़ी हुई एक खूबसूरत कला है। यह वो पल होता है जब एक पत्नी अपने पति का नाम सीधे नहीं, बल्कि प्यार और चतुराई से लेती है—और सुनने वाले मुस्कुरा उठते हैं।
आज के डिजिटल दौर में जहां रिश्तों में औपचारिकता बढ़ रही है, वहीं उखाणे हमें याद दिलाते हैं कि रिश्तों में मिठास छोटे-छोटे शब्दों से भी घोली जा सकती है।
उखाणे क्या होते हैं? (What is Ukhane in Marathi)

उखाणे एक पारंपरिक मराठी काव्य शैली है, जिसमें व्यक्ति अपने जीवनसाथी या किसी प्रिय का नाम सीधे न लेकर, तुकबंदी और रचनात्मक अंदाज में लेता है।
यह परंपरा खासतौर पर शादी, त्योहार और पारिवारिक आयोजनों में देखने को मिलती है।
आसान भाषा में:
उखाणे = प्यार + सम्मान + मजेदार अंदाज में नाम लेना
उखाणे का सांस्कृतिक महत्व (Kunbi Maratha Perspective)
कुनबी मराठा समाज में उखाणों का महत्व सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई गहरी भावनाओं से जुड़ा होता है:
- पति-पत्नी के रिश्ते में अपनापन बढ़ाना,
- परिवार और समाज को जोड़ना,
- हर रस्म को यादगार बनाना,
- महिलाओं को अपनी अभिव्यक्ति का मंच देना।
गांवों में आज भी देखा जाता है कि जब नई बहू पहली बार उखाणा बोलती है, तो पूरा परिवार उत्सुकता से सुनता है—यह पल उसके लिए भी खास होता है और परिवार के लिए भी।
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उखाणे किस भाषा में बोले जाते हैं?
उखाणे मुख्य रूप से मराठी भाषा में बोले जाते हैं, लेकिन कोंकणी और कुछ हिंदी भाषी समुदायों में भी इसका प्रभाव देखने को मिलता है।
आजकल युवा पीढ़ी इसे हिंदी और मिक्स भाषा में भी बोलने लगी है, जिससे यह परंपरा और भी व्यापक हो रही है।
Ukhane ko hindi me kya bolte hai?
“उखाणे” को हिंदी में सीधे अनुवाद करने के लिए कोई सटीक शब्द नहीं है, क्योंकि यह एक विशेष प्रकार की मराठी काव्य शैली है, उखाणे का हिंदी में कोई सटीक शब्द नहीं है, लेकिन इसे इस तरह समझा जा सकता है:
- छोटे कवितामय वाक्य
- नामोच्चार काव्य
- हास्यपूर्ण पारंपरिक पंक्तियां
लेकिन सच कहें तो,
उखाणे का असली मजा तभी आता है जब इसे महसूस किया जाए, अनुवाद में नहीं।
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उखाणे कब और कहां बोले जाते हैं?
1. शादी में
शादी के दौरान दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे का नाम उखाणों के माध्यम से लेते हैं।
यह पल अक्सर हंसी और तालियों से भर जाता है।
2. हल्दी-कुंकू और मकर संक्रांति
महिलाएं एक-दूसरे को तिलगुड़ देते हुए उखाणे बोलती हैं।
इससे आपसी रिश्ते और मजबूत होते हैं।
3. आइक और अन्य रस्में
शादी की रस्मों जैसे आइक में भी उखाणे माहौल को हल्का और आनंदमय बनाते हैं।
4. पारिवारिक आयोजन
गांव में बैठकी या पारिवारिक कार्यक्रमों में यह एक मजेदार खेल की तरह होता है।
उखाणे की खास बातें
- रचनात्मक और तुकबंदी वाले होते हैं,
- हास्य और प्यार का सुंदर मिश्रण,
- सीधे नाम लेने के बजाय सम्मानजनक तरीका,
- हर उम्र के लोग इसमें भाग ले सकते हैं।
New Ukhane in Marathi For Female 2026
- कृष्णाचा जन्म झाला जन्माष्टमीच्या दिवशी, अलोक जी च नाव घेते मी मकर संक्रांतीच्या दिवशी।
- गोकुल के श्याम, अयोध्या के राम साबरे जी के चरणों में, चारों धाम🙏
- नव्या नव्या जोडप्यांनी आशीर्वादासाठी वाकले, आलोकजींसोबत मी सासरी पाऊल टाकले

- लाल मणी तोडले, नविन मणी जोडले — अलोकजीसाठी आई-बाबा सोडले।
- बघोड़े का गहेना, इंदौर का रहना, आलोक जी से कहना – मिलजुलकर रहना!
- तुळशीसमोर काढते सुंदर रांगोळी, आलोकजींच्या नाव घेते हळद-कुंकवाच्या वेली।
- शुभ मंगल प्रसंगी अक्षतात पडल्या माथी, आलोक राव जी आहे माझे जीवनसाथी।
मकर संक्रांती स्पेशल उखाणे 2026
1)
कैरीच्या पानावर कोय कोय ऊन,
आलोक रावणचं नाव घेते, साबरेजींची सून.
2)
नाव घ्या, नाव घ्या, हा काय कायदा,
रीत माझी आहे, त्यात तुमचा काय फायदा.

3)
नाव घ्या, नाव घ्या, नावात काय विशेष,
आलोकजींचं नाव घेते, मी त्यांची मिसेस.
4)
यमुनेच्या तीरी, कृष्ण वाजवत होता बासुरी,
आलोकजींचं नाव घेते, मी आले सासरी.
5)
यमुनेच्या तीरी, आंब्रवृक्षाची सावली,
आलोकजींना जन्म देणारी, धन्य ती माऊली.
नए मराठी उखाणे 2026
- “मोनू न केल लग्न, अपल्यासाठी आणली बायको। माझ्या आईची सुन लागते, सोनूची वह्यानी, साबरे परिवारच्या बाल मनोहरची चाचीही लागते। बागोड्याची लेक आहे, आणि नाव—आपल्या मोनूची रीता—अभिमानाने सांगते।
ननद बाई के लिए मराठी उखाणे (Nanad Ke Liye Marathi Ukhane)
अतरा वड़ी वर पत्रा वड़ी – पत्रा वड़ी वर भात,
भाता वर वरन – वरना वर तूप,
तुपा सारखा रूप – रूपा उन सुन्दर आहे आमचा जोड़ा!
(आलोक जी) च नव घेते – ननद बाई आता तरी आमची वाट सोडा।
मराठी उखाणे पुरुष के लिए
पुरुषों के लिए मजेदार और आसान मराठी उखाणे, जो विवाह या सामाजिक आयोजनों में कहे जा सकते हैं:
- सूरज उगतो पूर्व दिशेला, माझ्या बायकोचं नाव आहे सगळ्यांच्या मने जिंकायला!
- गंगेतल्या पाण्याला नाही रंग, माझ्या पत्नीचं नाव आहे सगळ्यांत तगडं संग!
- चांदणी रात चमचमता चांद, माझ्या अर्धांगिनीचं नाव आहे सगळ्यांचं मान!
- सात पगड्यांच्या मागे आहे साग, माझ्या जीवनसाथीचं नाव आहे फारच खास!
- हल्ली सगळं झालय ऑनलाईन, माझ्या सौभाग्यवतीचं नाव आहे दिव्य प्रकाश!
- शेतावर फुललाय सोन्याचा गहू, माझ्या पत्नीचं नाव आहे सर्वांत छान राहू!
- दूध आणि साखरेसारखं गोड आमचं नातं, माझ्या गृहलक्ष्मीचं नाव आहे सगळ्यांना बांधून ठेवतं!
- सतत बदलणारं हवामान, माझ्या जोडीदाराचं नाव आहे सगळ्यांत छान!
- सिंहासनावर बसलेला राजा, माझ्या अर्धांगिनीचं नाव आहे तिच्या घराचा दरवाजा!
- लाडवाचा तुकडा गोड आणि मऊ, माझ्या प्रिय पत्नीचं नाव आहे सगळ्यांच्या मनांवर ठसलेलं ठाऊक!
मराठी उखाणे महिलाओ के लिए
रात्री चमकतात आकाशात चांदण्या,
(पतीचं नाव) आहेत माझ्या प्रेमाचा आधार बनल्या.
सोन्याच्या अंगठीला चमकतं हिऱ्याचं नक्षी,
(पतीचं नाव) आहेत माझ्या सुखाच्या यशाची कळशी.
सणासुदीला वाजतो सनईचा आवाज,
(पतीचं नाव) आहेत माझ्या आयुष्याचा गोड संवाद.
चंद्राला पाहून हळदी कुंकवाची ओटी भरते,
(पतीचं नाव) माझ्या मनाचा दीप उजळते.
मोहक तुळशीच्या रोपाला देते मी पाणी,
(पतीचं नाव) आहेत माझ्या सुखाचं कारण ठरलेलं साचं जाणी.
आकाशात तळपतो तेजस्वी सूर्यप्रकाश,
(पतीचं नाव) माझ्या आयुष्याचा आहेत खास.
वाढदिवसाला लावते केकावर मेणबत्ती,
(पतीचं नाव) आहेत माझ्या मनात घर करून बसलेलं माणूस घट्ट!
कृष्णाने गोकुळात वाजवली मुरली,
(पतीचं नाव) माझ्या मनात भरली खुशालीची फुलं खरी.
चुलीवर चढवते फुलांच्या वरणाचा भांडा,
(पतीचं नाव) आहेत माझ्या संसाराचा खांदा.
पुजेला घेतला तांदुळाचा एक सडा,
(पतीचं नाव) आहेत माझ्या जीवनाचा खरा गोडवा.
उखाणे और आज की युवा पीढ़ी
आज की पीढ़ी सोशल मीडिया और मोबाइल में व्यस्त है, लेकिन अच्छी बात यह है कि उखाणे अब Instagram reels और YouTube shorts के जरिए फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं।
अगर युवा चाहें तो:
- अपने दादा-दादी से पुराने उखाणे सीख सकते हैं।
- नए उखाणे खुद बना सकते हैं।
- सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं।
इससे परंपरा भी बचेगी और नई पहचान भी बनेगी।
निष्कर्ष:
उखाणे सिर्फ मजाक या मनोरंजन नहीं हैं, बल्कि यह हमारे रिश्तों में प्यार, सम्मान और अपनापन जोड़ने का एक सुंदर तरीका हैं।
कुनबी मराठा समाज में यह परंपरा हमें यह सिखाती है कि
रिश्ते शब्दों से नहीं, भावनाओं से बनते हैं—और उखाणे उन भावनाओं को खूबसूरती से व्यक्त करते हैं।
अगर आपने कभी उखाणा काभी नहीं बोले, तो अगली शादी या त्योहार में जरूर कोशिश करें—यकीन मानिए, वो पल आपके लिए हमेशा यादगार बन जाएगा।
सुझाव और सहयोग:
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उखाणे क्या होते हैं?
उखाणे मराठी परंपरा की एक खास काव्य शैली है, जिसमें व्यक्ति अपने जीवनसाथी का नाम सीधे न लेकर, तुकबंदी और मजेदार अंदाज में लेता है।
उखाणे क्यों लिए जाते हैं?
उखाणे लेने का मुख्य उद्देश्य होता है—
– रिश्तों में प्यार और अपनापन बढ़ाना
– समारोह को मनोरंजक बनाना
– परंपरा को जीवित रखना
क्या केवल महिलाएं ही उखाणे लेती हैं?
नहीं, उखाणे महिलाएं और पुरुष दोनों बोलते हैं। हालांकि परंपरागत रूप से महिलाएं ज्यादा उखाणे बोलती हैं, लेकिन अब पुरुष भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
उखाणे किस भाषा में बोले जाते हैं?
उखाणे मुख्य रूप से मराठी भाषा में बोले जाते हैं, लेकिन आजकल हिंदी और मिक्स भाषा में भी उखाणे बोले जाने लगे हैं।
क्या उखाणे में नाम लेना जरूरी होता है?
हाँ, उखाणे की सबसे खास बात ही यह है कि इसमें व्यक्ति अपने जीवनसाथी या प्रिय का नाम रचनात्मक तरीके से लेता है।
