क्या आपने कभी सोचा है कि लोन्हारी कुनबी मराठा समाज मध्य प्रदेश में कैसे आया?
मध्य प्रदेश में लोन्हारी कुनबी मराठा समुदाय का आगमन कोई अचानक घटी घटना नहीं है, बल्कि एक ऐतिहासिक प्रक्रिया का परिणाम है। यह समुदाय मूल रूप से महाराष्ट्र के मराठा क्षेत्र का रहने वाला है, लेकिन समय के साथ, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों से वे मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बस गए।
लोंहारी कुनबी मराठा का मध्य प्रदेश में आगमन कैसे हुआ?
बात 1674 ईस्वी की है, जब छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य या मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी। छत्रपति शिवाजी महाराज के दौरान ही, सैन्य शक्ति मजबूत हुई और मराठाओ का विस्तार हुआ।

छत्रपति शिवाजी के बाद, पेशवाओ का दौर आया। पेशवा काल मे खासकर बाजीराव प्रथम ने हिंदवी स्वराज्य / मराठा साम्राज्य की नींव पर एक विशाल साम्राज्य बनाया। उन्होंने मराठा शासन को आर्थिक और सैन्य रूप से मजबूत करने के लिए एक नियमित कर प्रणाली लागू की जिससे मराठा शासन आर्थिक और सैन्य रूप से मजबूत हुआ।
बाजीराव प्रथम के ही काल मे ही तेज और कुशल घुड़सवार सेना का विकास हुआ, इनकी खासियत ये थी की ये अचानक हमला और तेजी से पीछे हटने में माहिर थे। इस युद्ध को “गुरिल्ला युद्ध” के नाम से जाना जाता था। इनकी इसी रणनीति के कारण मराठाओ ने मुगलों, निज़ाम जैसे शासकों को बार-बार हराया। और दिल्ली, मालवा, बुंदेलखंड, गुजरात और बंगाल तक फैल गए।
17वीं-18वीं शताब्दी में तो, मराठों ने सिंधिया, होल्कर, भोंसले और गायकवाड़ जैसे नामी, शक्तिशाली सरदारों को अलग-अलग क्षेत्रों पर शासन करने की जिम्मेदारी सौंपकर मराठा साम्राज्य को एक संगठित नेटवर्क की तरह चलाया।
मध्य प्रदेश में मराठा शासन
मराठा शासन के दौरान, ये प्रमुख राजवंश उभरे:
- सिंधिया (ग्वालियर)
- होल्कर (इंदौर)
- पंवार (धार)
- भोंसले (नागपुर-जबलपुर क्षेत्र)
इन शासकों ने अपने-अपने क्षेत्रों का विस्तार करने के लिए, अपने साथ मराठी सैनिक, किसान, कारीगर को लाए, जो बाद में इन क्षेत्रों में बस गए। जिनमे से एक थे कुनबी मराठा, जो अपनी किसानी के लिए जाने जाते थे।
कुनबी समुदाय का मुख्य व्यवसाय:
कुनबी समुदाय पारंपरिक रूप से खेती में कुशल है। मराठा शासकों ने उन्हें खेती के लिए जमीन दी, और गांव बसाने में मदद की। इस तरह कुनबी परिवार स्थायी रूप से मध्य प्रदेश में बस गए।
ब्रिटिश काल के दौरान स्थायी पहचान:
19वीं शताब्दी मे ब्रिटिशों का दौर आया, इनके दौर मे:-
- भूमि रिकॉर्ड बनाए गए।
- जाति जनगणना की गई।
यहा से “कुनबी मराठा” समुदाय को एक अलग पहचान मिली और कुंबी मराठा समुदाय स्थायी रूप से मध्य प्रदेश के निवासी बन गए।
मराठा समुदाय के प्रकार
मराठा समुदाय मुख्य रूप से कई उप-समुदायों में बंटा हुआ है। यह वर्गीकरण उनके पारंपरिक व्यवसायों, भौगोलिक स्थान और सामाजिक रीति-रिवाजों पर आधारित है।
- देशस्थ मराठा: मूल रूप से महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों के रहने वाले।
- कोली मराठा: समुद्री तट पर रहने वाले और मछली पकड़ने से जुड़े हुए है।
- लोनारी कुंभी मराठा: खेती में कुशल।
- कोंकणस्थ मराठा: कोंकण क्षेत्र में बसे मराठा।
- जाधव, शिंदे और पवार मराठा: शाही राजवंशों से जुड़े परिवार।
लोनारी कुंभी मराठा और अन्य मराठा समुदायों में अंतर
1. पेशागत पहचान
लोनारी कुनबी मराठा समाज की पहचान हमेशा से खेती-किसानी से जुड़ी रही है।
गांवों में आज भी कई परिवार खेतों में मेहनत करते हुए नजर आते हैं — यही उनकी असली ताकत है।
वहीं दूसरी ओर, महाराष्ट्र के कुछ मराठा उप-समुदाय जैसे कोंकणस्थ, समय के साथ प्रशासन, व्यापार और शिक्षा से अधिक जुड़ गए।
आसान भाषा में:
- लोनारी कुनबी → जमीन से जुड़े लोग
- अन्य मराठा → शहर और प्रशासन से जुड़े लोग
2. रहने का स्थान
लोनारी कुनबी मराठा समुदाय आज मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में बस चुका है — जैसे छिंदवाड़ा, बैतूल, मुलताई, आमला आदि।
यहां का जीवन गांव और छोटे शहरों के आसपास घूमता है, जहां सरल जीवन और सामुदायिक जुड़ाव अभी भी मजबूत है।
वहीं महाराष्ट्र के मराठा समुदाय का बड़ा हिस्सा शहरों और तटीय इलाकों में रहता है।
3. सामाजिक संरचना
लोनारी कुनबी मराठा समाज में शादी-ब्याह और अन्य संस्कारों में स्थानीय मध्य प्रदेश की परंपराओं का असर साफ दिखाई देता है।
जैसे:
- रस्में सरल होती हैं
- पूरे गांव की भागीदारी होती है
वहीं महाराष्ट्र के मराठा परिवारों में आज भी कई जगहों पर शाही और पारंपरिक रीति-रिवाज ज्यादा देखने को मिलते हैं।
4. भाषाई अंतर
लोनारी कुनबी मराठा समाज की एक खास बात यह है कि वे बहुभाषी होते हैं।
आमतौर पर:
- मराठी
- हिंदी
- और स्थानीय बोली
तीनों का मिश्रण उनकी रोज़मर्रा की भाषा में देखने को मिलता है।
जबकि महाराष्ट्र के मराठा समुदाय में मुख्य रूप से मराठी भाषा ही बोली जाती है।
लोनारी कुंभी मराठा के धार्मिक और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों का अंतर
1. शादी की परंपराएँ
लोनारी कुनबी मराठा समाज में शादी सरल, सामुदायिक और अपनापन भरा होता है। इनकी शादियों मे दिखावा कम और रिश्तों की गर्माहट ज्यादा होती है।
वहीं महाराष्ट्र में कई मराठा परिवारों में शादी धार्मिक विधियों और बड़े समारोहों के साथ होती है।
2. पूजा-पाठ की प्रथाएँ
लोनारी कुनबी मराठा समाज ने समय के साथ मध्य प्रदेश की स्थानीय आस्था को भी अपनाया है।
यहां लोग:
- नर्मदा मैया
- महाकाल की पूजा भी उतनी ही श्रद्धा से करते हैं।
जबकि महाराष्ट्र में:
- तुलजा भवानी
- और छत्रपति शिवाजी महाराज की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
3. त्योहारों को अपनाना
मध्य प्रदेश में बसने के बाद इस समाज ने यहां के त्योहारों को भी अपनाया है।
जैसे:
- नर्मदा जयंती
- स्थानीय मेले
साथ ही:
- गणेश चतुर्थी
- दिवाली
भी मनाए जाते हैं, लेकिन उनमें स्थानीय रंग झलकता है।
लोनारी कुंभी मराठा: मध्य प्रदेश में में एक अलग पहचान
- ग्रामीण जीवन से गहरा जुड़ाव: गांव की मिट्टी, खेती और पशुपालन से इनका रिश्ता आज भी मजबूत है।
- आर्थिक योगदान: खेती और छोटे व्यापार के जरिए यह समाज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है।
- सामाजिक एकता: उयहां आज भी “एक-दूसरे के काम आना” सिर्फ कहावत नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है।
अनूठी परंपराएं और रीति-रिवाज
लोनारी कुनबी मराठा समाज में शादी केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और पूरे समाज का मिलन होती है।
खास बातें:
- हल्दी और मंडप में स्थानीय रंग
- गोत्र का सख्ती से पालन
- कुल देवता की पूजा अनिवार्य
त्योहार और धार्मिक आयोजन
यहां त्योहार सिर्फ मनाए नहीं जाते, बल्कि जीए जाते हैं।
खास बात:
- हर त्योहार में गांव की भागीदारी
- स्थानीय देवी-देवताओं को अपनाना
भोजन और व्यंजन
यहां का खाना भी इस समाज की कहानी बताता है – महाराष्ट्र + मध्य प्रदेश का अनोखा मेल
- भाकरी, कढ़ी, बैंगन का भरता
- साथ में पोहा, वड़ा पाव, पूरन पोली
मतलब: स्वाद भी मिला-जुला, बिल्कुल संस्कृति की तरह
निष्कर्ष
लोनारी कुनबी मराठा समुदाय, मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। यह समाज अपनी जड़ों (महाराष्ट्र) से जुड़ा रहते हुए भी, स्थानीय संस्कृति को अपनाकर एक नई और अनोखी पहचान बना चुका है।
यही कारण है कि आज यह समुदाय परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सुंदर संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहा है।
सुझाव और सहयोग:
यदि इस लेख में दी गई कोई जानकारी अधूरी या गलत लगे, तो कृपया हमें अवगत कराएँ। आपके सुझाव हमें समाज से जुड़ी सही और प्रामाणिक जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित करते हैं। लेख अच्छा लगे तो शेयर करें ❤️ और यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आए, तो आपका छोटा-सा सहयोग हमारे लिए बड़ी प्रेरणा होगा। 🙏

लोनारी कुनबी मराठा कौन होते हैं?
लोनारी कुनबी मराठा समुदाय एक ऐसा समाज है जिसकी जड़ें महाराष्ट्र से जुड़ी हुई हैं, लेकिन आज यह मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बसा हुआ है।
यह समुदाय मुख्य रूप से खेती-किसानी से जुड़ा रहा है और अपनी सादगी, मेहनत और परंपराओं के लिए जाना जाता है।
लोनारी कुनबी मराठा और अन्य मराठा समुदायों में क्या अंतर है?
सबसे बड़ा अंतर उनकी जीवनशैली और स्थान का है।
लोनारी कुनबी मराठा → गांव, खेती और सरल जीवन से जुड़े
अन्य मराठा → शहर, प्रशासन और व्यापार से जुड़े
इसके अलावा भाषा, शादी की रस्में और त्योहार मनाने के तरीके में भी फर्क देखने को मिलता है।
लोनारी कुनबी मराठा समाज मध्य प्रदेश में कैसे आया?
जब मराठा साम्राज्य फैला, तो कई सैनिक, किसान और परिवार नए क्षेत्रों में जाकर बस गए – उसी दौरान यह समुदाय भी मध्य प्रदेश में आकर बस गया। समय के साथ उन्होंने यहीं अपना घर बना लिया।
Kunbi Maratha कौन-कौन सी भाषा बोलते हैं?
इस समाज की एक खास बात यह है कि यह बहुभाषी होता है।
आमतौर पर लोग:
मराठी
हिंदी
और स्थानीय बोली
तीनों का इस्तेमाल करते हैं, जो उनकी संस्कृति को और भी समृद्ध बनाता है।
