कुनबी मराठा समाज की शादी में हर रस्म अपने आप में एक कहानी होती है—एक ऐसी कहानी जो हमारे संस्कार, हमारी मिट्टी और हमारी पहचान को दर्शाती है।
आज के समय में जहां शादियां होटल और मैरिज गार्डन तक सीमित होती जा रही हैं, वहीं कुछ परंपराएं अब भी हमें अपने गांव, अपने लोगों और अपनी जड़ों से जोड़े रखती हैं।
इन्हीं में से एक बेहद खास और भावनाओं से भरी रस्म है—आइक रस्म।
यह सिर्फ मिट्टी के बर्तनों को लाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह परिवार, रिश्तों और परंपराओं के सम्मान की एक सुंदर झलक है।
आइक रस्म क्या है? (Aik Ritual in Kunbi Maratha Wedding)
आइक रस्म कुनबी मराठा शादी की एक पारंपरिक रस्म है, जिसमें शादी में उपयोग होने वाले मिट्टी के बर्तन और अन्य सामान को पूजा के साथ सम्मानपूर्वक लाया जाता है।
यह रस्म हमें सिखाती है कि—
शादी में उपयोग होने वाली हर वस्तु भी पूजनीय होती है, क्योंकि वह एक नए जीवन की शुरुआत का हिस्सा बनती है।
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आइक रस्म की शुरुआत कैसे होती है?
इस रस्म की शुरुआत घर में रखे गए सामान की पूजा से होती है।
शादी में उपयोग होने वाली चीजें जैसे:
- सूपा (सुफा)
- जहिबे
- बांस की छोटी-बड़ी टोकरी
- 5 झाड़ू
- मिट्टी के छोटे-बड़े बर्तन
इन सभी की आरती की जाती है।
अगर आपने कभी गांव में यह दृश्य देखा हो, तो समझ जाएंगे—
जब महिलाएं मिलकर गीत गाते हुए आरती करती हैं, तो पूरा माहौल एक अलग ही श्रद्धा और अपनापन से भर जाता है।
सुपे की सजावट और उसका महत्व

आइक रस्म में सुपे (सूपा) को खास तरीके से सजाया जाता है, जो इस रस्म का मुख्य हिस्सा होता है।
- हरखण्ड (लकड़ी की डिब्बी)
- वाक (पलाश की जड़ों से बनी रस्सी)
- कच्चा धागा
इनसे सुपे को सजाया जाता है।
कच्चे धागे को सुपे के एक कोने से दूसरे कोने तक 5 बार लपेटा जाता है, जो एक प्रतीक है— बंधन, सुरक्षा और शुभता का
इसके बाद आटे की रोटी बनाकर उस धागे के ऊपर रखी जाती है ताकि धागा स्थिर रहे।
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नांदोलए (आटे के दीये) का महत्व
आइक रस्म में आटे से बने दो छोटे दीये—जिन्हें नांदोलए कहा जाता है—भी बनाए जाते हैं।
- इन्हें सुपे पर रखा जाता है
- इनमें तेल डालकर बत्ती जलाई जाती है
यह दीपक सिर्फ रोशनी नहीं देते, बल्कि यह संकेत होते हैं—
नए जीवन में उजाला, सुख और समृद्धि का।
आइक रस्म कैसे निभाई जाती है?

यह रस्म बहुत ही खूबसूरत तरीके से निभाई जाती है:
- दो पुरुष चादर के कोनों को पकड़कर उसे फैलाते हैं
- दो मुख्य महिलाएं उस चादर के अंदर रहती हैं
- महिलाएं गीत गाते हुए आरती लेकर आइक लेने जाती हैं
यह दृश्य बहुत ही भावुक होता है—
जहां गीतों में खुशी भी होती है और जिम्मेदारी का एहसास भी।
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आइक का असली अर्थ क्या है?
आइक का मतलब उन मिट्टी के बर्तनों से होता है, जो शादी के लिए पहले से खरीदे जाते हैं और किसी रिश्तेदार के घर सुरक्षित रखे जाते हैं।
पुराने समय में ये बर्तन सीधे कुम्हार से लाए जाते थे और रस्म उसी दिन पूरी हो जाती थी।
लेकिन आज के समय में:
- कुम्हार आसानी से उपलब्ध नहीं होते
- इसलिए बर्तन पहले किसी रिश्तेदार के घर रख दिए जाते हैं
- और आइक रस्म के समय उन्हें सम्मान के साथ लाया जाता है
यह बदलाव दिखाता है कि
समय बदल सकता है, लेकिन परंपराओं की भावना आज भी वही है।
रिश्तेदार के घर पर आइक रस्म की प्रक्रिया
जब आइक लेने के लिए रिश्तेदार के घर पहुंचते हैं, तो वहां भी रस्म पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है:
- उस घर की महिला को चौक (रंगोली) बनाकर पाटे पर बैठाया जाता है
- उन्हें हल्दी और कुमकुम लगाया जाता है
- 5 महिलाएं अक्षत (चावल) चढ़ाती हैं
- मिट्टी के बर्तनों की पूजा की जाती है
यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि रिश्तों का सम्मान और आभार व्यक्त करने का तरीका है।
आज के समय में आइक रस्म का महत्व
आज के डिजिटल और तेज़ जीवन में, ऐसी रस्में हमें धीमा होकर रिश्तों को जीना सिखाती हैं।
- यह परिवार को जोड़ती है
- महिलाओं की भागीदारी को सम्मान देती है
- युवाओं को अपनी संस्कृति समझने का मौका देती है
खासकर आज की युवा पीढ़ी के लिए जरूरी है कि
वे इन रस्मों को सिर्फ देखें नहीं, बल्कि समझें भी।
निष्कर्ष
आइक रस्म कुनबी मराठा समाज की एक ऐसी खूबसूरत परंपरा है, जो हमें सिखाती है कि जीवन की छोटी-छोटी चीजों का भी सम्मान करना चाहिए।
यह रस्म हमें जोड़ती है—
हमारी मिट्टी से, हमारे लोगों से और हमारी पहचान से।
अगर हम चाहते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति को समझें और उस पर गर्व करें, तो हमें इन परंपराओं को सिर्फ निभाना नहीं, बल्कि दिल से अपनाना होगा।
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प्रश्न 1: आइक रस्म किस समाज में मनाई जाती है?
उत्तर: आइक रस्म मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के मराठी कुंबी समाज में विवाह के अवसर पर की जाती है।
प्रश्न 2: आइक में कौन-कौन सी वस्तुएँ शामिल होती हैं?
उत्तर: आइक में मिट्टी के बर्तन, सुपा, बांस की टोकरियाँ, झाड़ू, हरखण्ड, वाक (रस्सी) और आटे से बने दीपक शामिल होते हैं।
प्रश्न 3: आइक रस्म का धार्मिक महत्व क्या है?
उत्तर: यह रस्म शुभता, समृद्धि और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इसमें की गई पूजा से विवाह में मंगल और सौभाग्य की कामना की जाती है।
प्रश्न 4: आइक रस्म कब संपन्न की जाती है?
उत्तर: यह रस्म मंगर्मठनी और मेस्कय रस्म के बाद की जाती है।
प्रश्न 5: पुराने समय और आज के समय की आइक रस्म में क्या अंतर है?
उत्तर: पहले मिट्टी के बर्तन सीधे कुम्हार से लाए जाते थे और रस्म दिन में ही होती थी, जबकि आजकल बर्तन रिश्तेदारों के घर रखकर विवाह के समय वहाँ से लाए जाते हैं।
