गांव की शादियों में एक अलग ही रौनक होती है—ढोल की आवाज़, घर में आती-जाती रिश्तेदारों की चहल-पहल, और हर चेहरे पर खुशी की चमक।
इन सबके बीच कुछ ऐसे पल भी होते हैं, जो बड़े साधारण लगते हैं, लेकिन दिल में हमेशा के लिए बस जाते हैं।
ऐसे ही पलों में छिपी होती हैं हमारी परंपराएं—जो बिना किसी दिखावे के रिश्तों को और करीब ले आती हैं।
कुनबी मराठा समाज में भी शादी की कई ऐसी ही रस्में हैं, जो सिर्फ निभाई नहीं जातीं, बल्कि जी जाती हैं।
इन्हीं में से एक खास और दिलचस्प परंपरा है चट–पुन रस्म।
यह हंसी, प्यार, मज़ाक और रिश्तों की मिठास से भरा एक खूबसूरत अनुभव है।
चट–पुन’ रस्म क्या है?
चट–पुन रस्म कुनबी मराठा समाज की एक पारंपरिक शादी की प्रथा है, जिसे खासतौर पर दूल्हा/दुल्हन की बहन और उनके पति और उनके पति के साले के माध्यम से निभाया जाता है।
इस रस्म का उद्देश्य होता है—
- परिवार के रिश्तों को मजबूत करना,
- जीजा और साले के बीच अपनापन बढ़ाना
- शादी के माहौल में खुशी और हल्कापन लाना।
यह रस्म दिखाती है कि शादी सिर्फ रस्मों का बोझ नहीं, बल्कि खुशियों का त्योहार भी है।
Chat-Pun रस्म की तैयारियाँ कैसे की जाती हैं?
इस रस्म की तैयारी बहुत ही पारंपरिक तरीके से की जाती है।
इसमें मुख्य रूप से शामिल होता है:
- चौक जिसे (नांगोरी) कहा जाता हैं,
- लकड़ी के पट्टे (पटे) रखे जाते हैं,
- गुड़ और फूटा हुआ नारियल (khobra) तो इस रस्म मे सबसे महत्वपूर्ण है,
- कच्चा सूती धागे का भी उपयोग होता है,
- लकड़ी की दो छड़ें भी साथ होती हैं।
ये सभी चीजों का इस्तेमाल रस्म के अलग-अलग चरणों में किया जाता है, और हर एक चीज़ का अपना एक खास गहरा प्रतीकात्मक महत्व होता है।
‘चट–पुन’ रस्म की विस्तृत प्रक्रिया
चट–पुन रस्म शयाम के समए, मेसके रस्म के बाद होती है। सबसे पहले, एक तय जगह पर दो नांगोरी (चौक) बनाई जाती हैं। ये पवित्रता और संतुलन के प्रतीक के तौर पर काम करती हैं।

नांगोरी (चौक) के ठीक ऊपर् दो लकड़ी के पट्टे रखे जाते है। ये ठीक उसी लकड़ी के होते जिससे मंडप खड़ा हुआ है। फिर बहन और जीजाजी को साथ मे इन लकड़ी के पट्टे पर खड़े होने को कहा जाता है, जिससे इस रस्म की शुरुआत होती है।
1. बहन और जीजा का पट्टे पर खड़ा होना
रस्म की शुरुआत में बहन और जीजा जी लकड़ी के पट्टों पर खड़े होते हैं।
यह दर्शाता है—
- समानता
- संतुलन
- आपसी सम्मान
2. जीजा के पैर के नीचे गुड़ और नारियल रखना
इसके बाद, गुड़ (gur) का एक टुकड़ा और सूखे नारियल का छोटा टुकड़ा जीजा जी के बाएँ पैर के नीचे रखा जाता है।
- गुड़ (मिठास का प्रतीक) होता है।
- नारियल (समृद्धि और शुभता का प्रतीक) माना जाता है।
इस रस्म मे जीजाजी का महत्व इसलिए ज्यादा है, जीजा परिवार में मिठास और खुशियाँ लेकर आते हैं।
3. धागा और लकड़ी की मुख्य विधि
इस रस्म का सबसे महत्वपूर्ण चरण तब शुरू होता है जब लकड़ी की दो छड़ें
- जीजा जी के दाएँ कान के ऊपर;
- और उनके दाएँ पैर के नीचे रखी जाती है।
फिर एक कच्चा सूती धागा इन दो छड़ों के बीच लपेटा जाता है, जो ऊपर कान से शुरू होकर नीचे पैर तक जाता है। यह प्रक्रिया लगभग 5 से 7 बार दोहराई जाती है।

हर बार जब धागा लपेटा जाता है, तो बहन—चाहे वह दूल्हे की हो या दुल्हन की—उसे हाथ लगा कर छूती/टच करती है।
यह स्पर्श अपने भाई-बहन के वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाओं और आशीर्वाद का एक प्रतीकात्मक संकेत होता है।
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4. पवित्र धागे का महत्व
चट–पुन अनुष्ठान में उपयोग किया जाने वाला कच्चा धागा सिर्फ एक साधारण धागा नहीं होता, बल्कि उसे बहुत ही पवित्र और आस्था से जुड़ा माना जाता है।
जब रस्म पूरी हो जाती है, तो इस धागे को घर के पूजा-स्थल में रखे बड़े दीपक के भीतर सावधानी से रखा जाता है और उसे जलाया जाता है। यह दीपक यूँ ही नहीं जलता—यह पूरे परिवार की भावनाओं, प्रार्थनाओं और नवविवाहित जोड़े के उज्ज्वल भविष्य की कामना का प्रतीक बन जाता है।
जब तक दूल्हा और दुल्हन सभी शादी की रस्में पूरी करके घर वापस नहीं आ जाते, तब तक यह दीपक लगातार जलता रहता है।
ऐसा माना जाता है कि इस दीपक की लौ उनके जीवन में सुरक्षा, सुख-समृद्धि और एक शुभ, मंगलमय शुरुआत का आशीर्वाद लेकर आती है।
5. साले द्वारा नारियल निकालने की रस्म (सबसे मजेदार हिस्सा)
यह पूरी रस्म का सबसे दिलचस्प भाग होता है,
- जीजा पूरा प्रयास करते है की वो नारियल को पैर के नीचे से निकालने ना दे, जोर दार दबाकर रखते हैं,
- और उनका साला इस प्रयास मे लगा रहता है की वो नारियल का टुकड़ा जल्द से जल्द निकाल ले।
इस दौरान:
- हंसी-मज़ाक होता है,
- पूरा परिवार खुश होता है।
जब साला नारियल निकाल लेता है, तो इसे शुभ माना जाता है।
6. जीजा द्वारा साले को उपहार देना
अंत में जीजा साले को उपहार या पैसे देते हैं।
यह दर्शाता है—
- सम्मान
- स्नेह
- रिश्ते की मजबूती
यह छोटी सी भेट उनके रिश्ते में नज़दीकी और स्नेह की भावना को और भी गहरा कर देता है।
साले को भेट मिलने के बाद, साला अपनी दीदी – जीजाजी के पैर पढ़ता है और रसम यही संपन्न हो जाती है।
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इस रस्म का असली मतलब क्या है?
चट–पुन रस्म सिर्फ मज़ाक नहीं है…
इसके पीछे गहरे अर्थ छिपे हैं:
- रिश्तों में मिठास लाना
- परिवार को एकजुट करना
- नए रिश्तों को अपनाना
यह रस्म सिखाती है कि—
रिश्ते सिर्फ औपचारिक नहीं होते, उन्हें जीना पड़ता है।
एक छोटा सा वास्तविक अनुभव
गांव में जब यह रस्म होती है, तो छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सब इसका हिस्सा बनते हैं।
किसी के चेहरे पर मुस्कान होती है, कोई हंसते-हंसते लोटपोट हो जाता है…
ऐसे ही पल होते हैं जो शादी को यादगार बनाते हैं।
धार्मिक और पारंपरिक दृष्टिकोण
धार्मिक दृष्टिकोण से, ‘चट–पुन’ अनुष्ठान में उपयोग की जाने वाली प्रत्येक वस्तु—गुड़, नारियल, धागा और लकड़ी—का अपना एक विशिष्ट महत्व है।
ये सभी तत्व मिलकर एक ऐसी प्रक्रिया का निर्माण करते हैं, जो न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि प्रेम, सहयोग, सम्मान और एकता जैसे जीवन के मूल मूल्यों को भी सुदृढ़ करती है।
आधुनिक समय में ‘Chat Pun Rasm’ की प्रासंगिकता
आज के तेज़ी से बदलते इस आधुनिक दौर में भी चट–पुन रस्म अपनी एक खास जगह बनाए हुए है। भले ही शादियों का तरीका अब पहले जैसा नहीं रहा—समय कम हो गया है, रस्में छोटी हो गई हैं—लेकिन कुछ परंपराएं ऐसी होती हैं जो बदलते समय के साथ भी दिलों में अपनी जगह बनाए रखती हैं।
चट–पुन भी उन्हीं में से एक है, जो लोगों को उनकी जड़ों से जोड़े रखने का काम करती है। यह रस्म हमें बहुत सहज तरीके से एक बड़ी बात सिखाती है—कि रिश्तों की असली खूबसूरती दिखावे या औपचारिकताओं में नहीं होती, बल्कि उस अपनापन में होती है, जो हंसी-मज़ाक, स्नेह और दिल से निभाए गए पलों में झलकता है।
निष्कर्ष
Chat Pun की रस्म कुनबी मराठा समुदाय की एक प्यारी परंपरा है, जो शादी को महज़ एक रस्म से बदलकर एक सच्चे उत्सव में बदल देती है। यह आध्यात्मिकता, पारिवारिक जुड़ाव और मनोरंजन का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।
यह रस्म हमें जीवन में रिश्तों की मिठास को संजोने के बारे में सिखाती है। ये छोटे-छोटे पल ही होते हैं—जो हँसी, स्नेह और आपसी सम्मान के साथ साझा किए जाते हैं—जो वास्तव में एक परिवार को मज़बूत बनाते हैं।
इस प्रकार, Chat-Pun महज़ एक रस्म नहीं है, बल्कि मानवीय रिश्तों की गहराई और सांस्कृतिक विरासत की सुंदरता का एक जीवंत प्रमाण है।
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चट–पुन रस्म क्या है?
यह कुनबी मराठा समाज की एक पारंपरिक शादी की रस्म है, जिसमें जीजा और साले के बीच मज़ेदार और भावनात्मक गतिविधियाँ होती हैं।
ट–पुन रस्म किसके द्वारा करवाई जाती है?
चट–पुन रस्म दूल्हे या दुल्हन की बहन और उनके जीजा जी द्वारा की जाती है।
अगर घर में अकेली बेटी हो और मंडप सूतने की रस्म उसी से करवाई जाती हो, तो चट–पुन रस्म उससे नहीं करवाई जाती। ऐसी स्थिति में यह रस्म परिवार की दूसरी बेटी—जैसे बुआ या चाचा की बेटी—द्वारा निभाई जाती है।
