कुनबी मराठा समाज में विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कृतियों का संगम माना जाता है। इसी पवित्र बंधन को मजबूत करने वाली कई पारंपरिक रस्में सदियों से निभाई जाती हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण और धार्मिक रस्म है “मेस्कय”।
यह रस्म मंगल माथनी के बाद की जाती है और इसे परिवार, देवता और नवविवाहित जोड़े के भविष्य के मंगल के प्रतीक रूप में देखा जाता है।
मेस्कय रस्म क्या है?
मेस्कय एक पारंपरिक धार्मिक प्रक्रिया है जिसमें विवाह से जुड़े शुभ प्रतीकों और खाद्य सामग्री को देवस्थान (मंदिर) में ले जाकर पूजा की जाती है। इसे परिवार की समृद्धि, दांपत्य जीवन की सुख-शांति और देव-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाता है।
मेस्कय रस्म कब की जाती है?

यह रस्म मंगल माथनी के तुरंत बाद आयोजित की जाती है। मंगल माथनी का अर्थ है—नई शुरुआत के लिए भूमि, मंडप और माहौल को शुभ करना। उसके बाद मेस्कय द्वारा देवताओं को नवयुगल के जीवन में मंगल कार्य सिद्ध होने की प्रार्थना की जाती है।
मेस्कय में लगने वाली टोकरी और उसका महत्व
मेस्कय के लिए एक विशेष बांस की टोकरी तैयार की जाती है। यह टोकनी शुभता, पवित्रता और प्राकृतिक तत्वों का प्रतीक मानी जाती है। इस टोकरी में विवाह और गृहस्थ जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सामान रखे जाते हैं।
टोकरी में रखे जाने वाले प्रमुख सामान:
- दुल्हा–दुल्हन के जूते–चप्पल
- तेल
- चिकसा / चिसक (मसूर दाल पीसकर बांधा हुआ)
- पूड़ी
- सब्जी
- रोटी
- भात (चावल)
- भजिया
- कुड़ोडी (तली हुई और बिना तली हुई)
- हल्दी
- कुमकुम
- अगरबत्ती
- दिया (जो पूरे रास्ते बुझना नहीं चाहिए)
- नारियल और एक छोटी गुंडी में पानी
- ऊपर से इसे एक सूपे से ढक दिया जाता है।
इन सभी वस्तुओं का धार्मिक, सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक महत्व होता है।
मेस्कय ले जाने का रीति-रिवाज
मेस्कय की टोकरी को पाँच सरनेम वाले पाँच पुरुष मिलकर मंदिर तक ले जाते हैं।
यह संख्या पाँच—पंचतत्व, परिवार की एकता, और सामूहिक आशीर्वाद का संकेत करती है।
मंदिर में मेस्कय की प्रक्रिया
मंदिर पहुँचकर टोकनी की सारी सामग्री एक-एक कर देवी-देवताओं के सामने सजाई जाती है। इसके बाद:
पूजा-पाठ किया जाता है जिसमें शामिल हैं—
- देवी का आह्वान
- दीप-प्रज्वलन
- हल्दी-कंकून अर्पण
- आरती
इसके बाद जो भी खाने योग्य सामग्री होती है, जो देवता को चढ़ाई गई वे वहीं बैठकर पांचों पुरुष ग्रहण करते हैं। प्रसाद ग्रहण करने का अर्थ होता है—नव दाम्पत्य जीवन के लिए देवी का आशीर्वाद स्वीकार करना।
जो प्रसाद बच जाता है, उसे किसी जरूरतमंद, बच्चों या गाय को खिलाया जाता है। यह दान भावना और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है।
मेस्कय की सामग्री का वापस लाना और देवस्थान पर रखना
पूजा के बाद टोकनी की सामग्री —
दुल्हा-दुल्हन के जूते-चप्पल, तेल, चिसक, हल्दी, कुमकुम, कुड़ोडी, दिया, नारियल व अन्य सामग्री —
घर लाकर देवस्थान (घर मे बैठे देवताओ ) के पास रख दी जाती है।
इसे विवाह के मंगल कार्य का शुभ प्रतीक माना जाता है और यह मान्यता है कि इससे नए दंपति का जीवन सुख, धन, स्वास्थ्य और शांति से भरा रहता है।
मेस्कय रस्म का सांस्कृतिक महत्व
- देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करना
- विवाह के मंगल कार्य को शुभ करना
- परिवार और समाज की सामूहिक सहभागिता
- दान, सेवा और प्रकृति के प्रति सम्मान
- नवविवाहितों के लिए समृद्धि और रक्षा की कामना
निष्कर्ष
मेस्कय केवल एक विवाह रस्म नहीं, बल्कि कुनबी मराठा संस्कृति की गहरी आध्यात्मिक परंपरा है। यह देव-देवताओं के आशीर्वाद, परिवार की एकता, और नए जीवन की खुशहाल शुरुआत का पवित्र संकेत है।
यदि आप अपने समुदाय की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाना चाहते हैं, तो इस तरह की रस्मों का दस्तावेज़ीकरण समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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