कुनबी मराठा समाज की शादी में हर रस्म का एक अपना समय, तरीका और भाव होता है। लेकिन कुछ रस्में ऐसी होती हैं जो पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना देती हैं—मेस्कय रस्म उन्हीं में से एक है।
अक्सर आपने देखा होगा कि शाम के समय, जब शादी का घर हल्की रोशनी और उत्साह से भरा होता है, तभी कुछ लोग एक टोकरी लेकर मंदिर की ओर जाते हैं। उस समय घर में एक अलग ही शांति और श्रद्धा का माहौल बन जाता है।
यही वो पल होता है जब मेस्कय निकाली जाती है—एक ऐसी परंपरा जो नई जिंदगी की शुरुआत से पहले भगवान का आशीर्वाद लेने का सबसे सच्चा तरीका है।
मेस्कय रस्म कब निकाली जाती है?
मेस्कय रस्म आमतौर पर शाम 7 से 7:30 बजे के बीच निकाली जाती है।
यह समय यूं ही नहीं चुना गया है।
शाम का समय दिन और रात के बीच का संतुलन होता है—इसे आध्यात्मिक रूप से शुभ माना जाता है।
गांवों में आज भी बुजुर्ग कहते हैं:
“शाम का दिया और भगवान का नाम—दोनों कभी खाली नहीं जाते।”
इसी विश्वास के साथ मेस्कय की शुरुआत होती है।
मेस्कय की टोकरी में क्या-क्या रखा जाता है?
मेस्कय के लिए एक खास बांस की टोकरी तैयार की जाती है, जिसे सादगी के साथ लेकिन पूरी श्रद्धा से सजाया जाता है।
टोकरी में रखी जाने वाली मुख्य सामग्री:
- दुल्हा/दुल्हन के जूते-चप्पल
- तेल
- चिकसा (मसूर दाल से बना)
- पूड़ी, सब्जी, रोटी, भात
- भजिया और कुड़ोडी
- हल्दी और कुमकुम
- अगरबत्ती
- जलता हुआ दिया (जो रास्ते में बुझना नहीं चाहिए)
- नारियल और एक छोटी गुंडी में पानी
इन सभी वस्तुओं को एक सूपे से ढक दिया जाता है, जो पवित्रता और सुरक्षा का प्रतीक होता है।
यहां हर चीज का अपना मतलब होता है—
खाना समृद्धि का प्रतीक, दिया आशा का, और नारियल शुभ शुरुआत का।
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मेस्कय रस्म कैसे निभाई जाती है?
1. टोकरी लेकर मंदिर जाना
मेस्कय की टोकरी को पांच अलग-अलग सरनेम वाले पांच पुरुष मिलकर उठाते हैं।

यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि एक संदेश है—
“समाज की एकता और साथ मिलकर जिम्मेदारी निभाना”
2. मंदिर में पूजा की प्रक्रिया
मंदिर पहुंचकर टोकरी में रखे सभी सामान को निकालकर देवी-देवताओं के सामने सजाया जाता है।
इसके बाद:
- पूजा-पाठ किया जाता है
- दीप जलाया जाता है
- हल्दी-कुमकुम अर्पित किया जाता है
- आरती की जाती है
उस समय का माहौल इतना शांत और भक्ति से भरा होता है कि हर कोई अंदर से जुड़ जाता है।
3. प्रसाद ग्रहण करना और बांटना
पूजा के बाद जो भी खाने की चीजें होती हैं, उन्हें वहीं बैठकर ग्रहण किया जाता है।
यह सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि
भगवान का आशीर्वाद होता है।
अगर कुछ बच जाता है, तो उसे:
- किसी जरूरतमंद को दे दिया जाता है
- या गाय को खिला दिया जाता है
यह परंपरा हमें सिखाती है—
“दान और सेवा ही सच्ची पूजा है”
4. सामग्री को घर लाना और देवस्थान पर रखना
पूजा के बाद टोकरी में रखी बाकी सामग्री को वापस घर लाया जाता है और देवस्थान (घर के मंदिर) में रख दिया जाता है।
इसका मतलब होता है कि:
- अब भगवान का आशीर्वाद घर में स्थापित हो गया है
- नवविवाहित जोड़े के जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी
एक छोटी सी सच्ची बात (Real Life Connection)
अगर आपने कभी अपने गांव में मेस्कय देखी हो, तो याद होगा—
जब टोकरी लेकर लोग जाते हैं, तो घर की महिलाएं दरवाजे तक उन्हें देखती रहती हैं और मन ही मन प्रार्थना करती हैं।
वह सिर्फ एक रस्म नहीं होती,
बल्कि हर मां, हर बहन की एक दुआ होती है—
“मेरे घर के बच्चे का जीवन खुशियों से भरा रहे”
मेस्कय (Meskay) रस्म का आज के समय में महत्व
आज के मॉडर्न समय में जहां कई रस्में सिर्फ दिखावे तक सीमित रह गई हैं, वहीं मेस्कय जैसी परंपराएं हमें असली संस्कृति से जोड़ती हैं।
- यह हमें परिवार और समाज के साथ जोड़ती है
- युवाओं को अपनी जड़ों की पहचान कराती है
- दान, सेवा और प्रकृति का महत्व सिखाती है
जरूरी है कि हम इन रस्मों को सिर्फ निभाएं नहीं, बल्कि समझें भी।
निष्कर्ष
मेस्कय रस्म हमें यह सिखाती है कि जीवन की हर नई शुरुआत में भगवान का आशीर्वाद, परिवार का साथ और समाज की एकता कितनी जरूरी होती है।
आज की पीढ़ी अगर इन परंपराओं को समझकर अपनाए, तो हमारी संस्कृति कभी कमजोर नहीं पड़ेगी।
अगर आप भी कुनबी मराठा समाज की ऐसी ही अनमोल परंपराओं को जानना चाहते हैं, तो इन्हें अपनी जिंदगी का हिस्सा जरूर बनाइए।
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मेस्कय रस्म क्या होती है?
मेस्कय रस्म कुनबी मराठा समाज की एक पारंपरिक धार्मिक रस्म है, जिसमें शादी से जुड़े शुभ सामान को टोकरी में रखकर मंदिर ले जाया जाता है और देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। इसका उद्देश्य नवविवाहित जोड़े के लिए सुख-शांति और समृद्धि की कामना करना होता है।
मेस्कय की टोकरी में क्या-क्या रखा जाता है?
मेस्कय की टोकरी में दुल्हा-दुल्हन के जूते-चप्पल, तेल, चिकसा, पूड़ी, सब्जी, रोटी, भात, भजिया, कुड़ोडी, हल्दी, कुमकुम, अगरबत्ती, जलता हुआ दिया, नारियल और पानी रखा जाता है। इन सभी वस्तुओं का धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व होता है।
मेस्कय रस्म में पांच लोग ही क्यों जाते हैं?
मेस्कय रस्म में पांच अलग-अलग सरनेम वाले पांच पुरुष टोकरी लेकर मंदिर जाते हैं। यह संख्या पंचतत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और समाज की एकता का प्रतीक मानी जाती है।
मेस्कय के बाद बचा हुआ प्रसाद क्या किया जाता है?
मेस्कय के बाद बचा हुआ प्रसाद या तो वहीं उपस्थित लोगों में बांटा जाता है, जरूरतमंदों को दिया जाता है या गाय को खिलाया जाता है। यह दान और सेवा की भावना को दर्शाता है।
मेस्कय की सामग्री को घर लाकर क्या किया जाता है?
मंदिर से वापस लाकर मेस्कय की सामग्री को घर के देवस्थान (घर के मंदिर) में रखा जाता है। इसे शुभ माना जाता है और विश्वास है कि इससे नवविवाहित जोड़े का जीवन सुख-शांति से भरा रहता है।
