आज कई मेहनती किसान युवा शादी के लिए इंतज़ार कर रहे हैं… पर क्यों?

खेती = कम कमाई… यही सोच रिश्ते आने से पहले ही रोक देती है।

अनिश्चित आय का डर… लोग भविष्य को लेकर भरोसा नहीं कर पाते।

शहर की चमक के सामने… गांव की सादगी फीकी लगने लगती है।

लड़कियों की उम्मीदें बदल चुकी हैं… उन्हें स्थिर और आसान जीवन चाहिए।

अच्छी स्थिति होने पर भी… “किसान” टैग सब पर भारी पड़ जाता है।

सोशल मीडिया ने लाइफस्टाइल बदल दी… शहर की चमक के सामने… गांव की सादगी फीकी लगने लगती है।

क्या आज के समय में किसान होना सच में कमजोरी है…  या हमारी सोच कमजोर हो गई है?