गोत्र क्या होते हैं?
गोत्र असल में आपके पूर्वजों की पहचान है, जो बताता है कि आप किस ऋषि की वंश परंपरा से जुड़े हैं।
आमतौर पर गोत्र पिता से मिलता है, यानी जो गोत्र आपके पिता का है, वही आपका भी होता है।
मुख्य रूप से 7 या 8 प्रमुख ऋषियों के आधार पर गोत्र माने जाते हैं, लेकिन समय के साथ इनकी संख्या और भी बढ़ गई है।
अधिकतर गोत्र का संबंध सप्तऋषियों से माना जाता है, जैसे कश्यप, भारद्वाज, वशिष्ठ आदि।
शादी में गोत्र इसलिए देखा जाता है,
ताकि एक ही वंश के लोगों के बीच शादी न हो, जिससे रिश्तों की शुद्धता बनी रहे।
इस परंपरा के पीछे एक वैज्ञानिक सोच भी है—नजदीकी खून के रिश्तों से शादी से बचना।
शादी के बाद लड़की का गोत्र पति के गोत्र के अनुसार माना जाता है।
the root of River Tapti
लेख पढे